Maitrak लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
Maitrak लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

रविवार, 29 मई 2016

सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण और पुनर्निर्माण का इतिहास | War of Somnath Temple, Gurjaratra

सोमनाथ मंदिर पर आक्रमण और पुनर्निर्माण का इतिहास

War History of Somnath Temple, Gujarat (Gurjaratra)

सोमनाथ मंदिर एक महत्वपूर्ण हिन्दू मंदिर है। गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र के वेरावल बंदरगाह में स्थित इस मंदिर के बारे में कहा जाता है। मंदिर का पुनर्निर्माण सातवीं सदी में वल्लभी के मैत्रक गुर्जर राजाओं ने किया। आठवीं सदी में सिन्ध के अरबी गवर्नर जुनायद ने इसे नष्ट करने के लिए अपनी सेना भेजी।

 गुर्जर नरेश शिलादित्य मैत्रक ( तृतीय , काल लगभग 720 ई) मैत्रक वंश गुर्जरो का प्राचीन वंश है, जिसकी स्थापना गुप्त वंश के एक गुर्जर सेनापति भट्टारक द्वारा 475 ई० में की गयी थी। वल्लभी इनके राज्य की राजधानी थी।

मैत्रक एक गुर्जर वंश का नाम है । मैत्रक का संस्कृत में अर्थ सूर्य होता है, इतिहासकारो के अनुसार मैत्रक मिहिर से बना शब्द है व जिनके पूर्वज कुषाण गुर्जर थे। व कुषाण गुर्जर साम्राज्य के पतन के बाद गुप्तो के अधीन राज्य किया।
मैत्रको ने गुप्त साम्राज्य के पतन के बाद स्वतन्त्र सत्ता प्राप्त की। सम्राट हर्षवर्धन की पुत्री का विवाह गुर्जर नरेश धारासेन मैत्रक से हुआ था।
गुर्जर नरेश शिलादित्य मैत्रक इस वंश के सबसे प्रतापी व पराक्रमी शासक हुए । शिलादित्य ने गुजरात से लेकर दक्षिण तक राज्य का विस्तार किया।इनके समय में बेहद प्रबल अरब आक्रमण हुए। मगर वीर गुर्जर सैना के संख्या में कम होने के बावजूद भी अरबो की विशाल व संसाधनो से परिपूर्ण सेना को पराजित कर जीत का डंका बजा देते थे।

इसके बाद गुर्जर सम्राट नागभट्ट ने 815 ईस्वी में इसका पुनर्निर्माण किया। इस मंदिर की महिमा और कीर्ति दूर-दूर तक फैली थी। इसके बाद गुजरात के गुर्जर शासक भीम और मालवा के गुर्जर सम्राट भोज ने इसका पुनर्निर्माण कराया।

अरब यात्री अल-बरुनी ने अपने यात्रा वृतान्त में इसका विवरण लिखा जिससे प्रभावित हो महमूद ग़ज़नवी ने सन १०२४ में कुछ ५,००० साथियों के साथ सोमनाथ मंदिर पर हमला किया, उसकी सम्पत्ति लूटी और उसे नष्ट कर दिया। ५०,००० लोग मंदिर के अंदर थे, प्रायः सभी कत्ल कर दिये गये।

 सन 1297 में जब दिल्ली सल्तनत ने गुजरात पर क़ब्ज़ा किया तो इसे पाँचवीं बार गिराया गया। मुगल बादशाह औरंगजेब ने इसे पुनः 1706 में गिरा दिया। इस समय जो मंदिर खड़ा है उसे भारत के गृह मन्त्री वीर गुर्जर सरदार वल्लभ भाई पटेल ने बनवाया और पहली दिसंबर 1995 को भारत के राष्ट्रपति शंकर दयाल शर्मा ने इसे राष्ट्र को समर्पित किया।

बताया जाता है आगरा के किले में रखे देवद्वार सोमनाथ मंदिर के हैं। महमूद गजनी सन १०२६ में लूटपाट के दौरान इन द्वारों को अपने साथ ले गया था।

हमेशा विदेशीयो के निशाने और कई बार के हमलो के बाद भी ऐसा ही खडा है।इसका श्रेय इन पांचो वीरो की ही जाता है।


शनिवार, 14 मई 2016

गुर्जर साम्राज्य - Gurjar Empires and Dynasties

                        गुर्जर साम्राज्य / Gurjar Empires

प्राचीन काल मे जब भारत देश का शासक एक राजा होता था शासन प्रणाली का नाम राजतॅत्र था तो वीर गुर्जरो ने एक छत्र और न्याय प्रिय शासन किया । 

जिसमे ये ये गुर्जर साम्राज्य प्रमुख है और गुर्जर इतिहास को समझने के प्रमुख बिंदु भी :

गुर्जर साम्राज्य / Gurjar Empires

1. कुषाण साम्राज्य (0- 375 ई०) | प्रतापी सम्राट - कनिष्क

2. हूण साम्राज्य (490-542 ई०)  | प्रतापी सम्राट - मिहिरकुल

3. प्रतिहार साम्राज्य (650-1036)| प्रतापी सम्राट - मिहिरभोज

• कुषाण साम्राज्य :

" गुर्जर सम्राट कनिष्क " इस काल के सबसे महान सम्राट थे, जिसकी सिमाए उजबेकिस्तान के काला सागर से लेकर भारत मे बंगाल की खाडी तक फैली हुई थी ।

• हूण साम्राज्य  :

हूण वंश के सबसे प्रतापी सम्राट " गुर्जर मिहीरकुल हूण थे, भारतवर्ष मे बौध्द और जैन घर्म के अवसान तथा हिंदु घर्म के पुर्नउत्थान मे मुख्य भूमिका के कारण कल्की अवतार के रूप मे देखा जाता है ।

• गुर्जर प्रतिहार साम्राजय :

नागभट ने 650 ई. मे इस साम्राज्य की नींव रखी थी।

मिहिर भोज इस साम्राजय के सबसे महानत्तम सम्राट हुए । हिंदु घर्म और संस्क्रति की रक्षा करने के कारण इन्हे भगवान विष्णु के अादिवराह अवतार के रूप मे देखा जाता है

समस्त गुर्जर राजाओं ने मिलकर अरबों से भारतीय संस्कृति की रक्षा की थी जिसके कारण उन्हें प्रतिहार (रक्षक) की उपाधी प्रदान की थी। तत्पश्चात समस्त गुर्जर राजा संगठित हो गये और एक राजा को संपूर्ण गुर्जरत्रा (गुर्जरों द्वारा रक्षित क्षेत्र) की कमान दी गयी जिसे गुर्जर सम्राट अथवा गुर्जर-प्रतिहार सम्राट कहा जाता था। गुजरात को गुर्जरदेश और गुर्जरत्रा कहा जाता था| गुजरत्रा मे गुजरात और राजस्थान क्षेत्र आा था। ब्रिटिश काल के प्रारंभ मे राजस्थान के कुछ हिस्सो को राजपुताना कहा गया।

गुर्जरात्रा  = गुर्जर + त्रा (देश) से गुजरात पडा

Gurjaratra / Gurjardesh - गुर्जरात्रा / गुर्जरदेश

इन गुर्जर प्रतिहारों के अधीन कई गुर्जर राजवंश थे। जिनमें मुख्य -

• परमार गुर्जर, 

• चौहान गुर्जर, 

• गुहिल गुर्जर, 

• मौर्य (मोरी) गुर्जर, 

• चंदेल गुर्जर, 

• गुर्जरेश चालुक्य (सोलंकी),

•  तोमर गुर्जर (तंवर),

 • खटाणा गुर्जर (हिंदुशाही राजवंश), 

• चप गुर्जर (चावडा/चपराणा)

• चोल वंश

• मैत्रक वंश

• भाटी वंश

• कलचुरी वंश

• भडाणा गुर्जर 

इत्यादि!

गुर्जर सेना संख्या में अरबों की सेना की सेना के सामने कुछ नहीं थी परंतु गुर्जरों ने गुर्जर रणनृत्य कला के जरिये अरबों को कई बार धूल चटाई।

गुर्जर रणनृत्य कला पर आज भी रिसर्च जारी है।

भारतीय संस्कृति और सभ्यता की रक्षा करने के कारण ही गुर्जरों को वीर गुर्जर कहा जाता है।

अरबों को सफलकापूर्वक परास्त करने के कारण ही गुर्जरों को "राष्ट्र रक्षक वीर गुर्जर" कहा गया है।