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मंगलवार, 17 मई 2016

24 बगडावतों गुर्जर राजाओ की रानियों के नाम

24 बगडावतों गुर्जर राजाओ की रानियों के नाम :

१ तेजा रावत - रूपांदे (छछियार) , बागांदे (लांगडी) 
२ सवाई भोज - रम्भादे (माता साडू खटानी), 
पद्मादे (पोषवाल), जयमती(सोलंकी)
 
३ नेवा रावत - नेतलदे (नेकाडी), पद्मादे (छावड़ी)

 ४ सैजा रावत - खानलदे (बराला), मानबाई 

५ धन्ना रावत - झूमाबाई (नरसल), फूलांदे (दायमा) 

६ महा रावत - पानबाई , फूलांबाई (फागना)

 ७ बाह रावत - सलवण (खटानी), छगनबाई (चंदेल) 

८ अड़सी रावत - नारायणीबाई (खोज्या), फूंदीबाई (भालेसर)

९ बड़सी रावत - धन्नीबाई (भूमला), पन्ना बाई (डोई)
 
१० सांगा रावत - अंजनाबाई (बावला), सजनाबाई 

११ माँगा रावत - भूलांदे (भड़ाना), गेंदीबाई
 (लितर्या) 

१२ आसा रावत - करणादे (हरसल), खानोबाई (गोरसी) 

१३ कासा रावत - गोमादे (खोज्यां), गुलाबबाई

 १४ गुदड़ रावत - मोतीबाई (गीड़), दाखांदे (धोगड़) 

१५ खांतड़ रावत - झूमरीबाई , मैनादे 

१६ काल्हा रावत - भंवरीबाई (सनावा), कंवरीबाई (चांदना) 
१७ कुबाण रावत - नौसरबाई (बारवाल), अमरीबाई (तामड़)

१८ करण रावत - बच्छलदे (कँवर), नन्दूबाई (नेतरड़ा) 

१९ जीवण रावत - दाखांदे (चौपड़ा), देवलदे (भाटी) 

२० ख़ान रावत - गोकल दे (चांदना), बिरदीबाई (सोहळ्या) 

२१ लाला रावत - नुरकादे (सूती), मूर्तिबाई (पंचोली) 

२२ जोधा रावत - गंगा दे (भातड़या), जमनाबाई (भड़क) 

२३ आल्हा रावत - फूलबाई (फागना), जगनबाई (ख़ुरांच) 

२४ बाला रावत - ब्रह्महा दे (चकबा चौहान), गीताबाई (टाटङ) !

सोमवार, 16 मई 2016

वीरांगना रामप्यारी गुर्जरी / Veerangna Rampyari Gurjari

                                                     वीरांगना रामप्यारी गुर्जरी 

Veerangna Rampyari Gurjari - The Warrior Queen

         


''रामप्यारी गुर्जरी''' का जन्म गुर्जरगढ (वर्तमान मे सहारनपुर) क्षेत्र में हुआ था। ये चौहान गोत्री गुर्जर थी
सन्  1398 में, जब तैमूर लैंग ने हरिद्वार से प्राचीन दिल्ली क्षेत्रों पर आक्रमण किया तो रामप्यारी गुर्जर ने तैमूरलैंग के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी। जबसे उसके नाम से पहले शब्द वीरांगना लगाया जाता है।
 रामप्यारी गुर्जरी के रण-कौशल को देखकर तैमूर दांतों के नीचे अंगुली दबा गया था। उसने अपने जीवन में ऐसी महिला को इस प्रकार 40 हजार औरतों की सेना का मार्गदर्शन करते हुए कभी नहीं देखा था और ना सुना था। तैमूर इनकी वीरता देखकर वह घबरा उठा था।

• परिचय :

 इन पर महाबली जोगराज सिंह गुर्जर का खासा प्रभाव था|इनको बचपन से ही वीरता की कहानियां और किस्से सुनने का शौक था। इनका जन्म से ही निर्भय और लड़ाकू स्वभाव की थी। देश के गुलामकल का दौर होते हुए भी बचपन में अपने खेतों पर अकेली चली जाने में आपको कभी डर नहीं लगता था। अपनी मां से प्रायः पहलवान बनने के लिए जिज्ञासा पूर्वक पूछा करती थी और प्रातः सांय खेतों पर जा कर अथवा एकान्त स्थान में व्यायाम किया करती थी। कुछ तो स्वयं बचपन से ही स्वच्छ सुड़ौल और आकर्षक शरीर की लड़की उस पर व्यायाम ने आपके व्यक्तित्व पर वही कार्य किया जो सोने पर अग्नि में तपकर कुन्दन बनने का होता है अर्थात आप कुंदन बन गई थी। रामप्यारी बचपन से किशोर अवस्था में कदम रखने लगी। आप सदैव लड़को जैसे वस्त्र पहनती थी और गांव और पड़ौसी गांवों में पहलवानों के कौशल देखने अपने पिता और भाई के साथ जाती थी| ऐसी वीरांगनाएं सदैव जन्म नहीं लिया करती। रामप्यारी की इन बातों की चर्चा सारे गांव और क्षेत्र में फैलने लगी। 

• 1398 मे तैमूर लंग से यूध्द :

जब-जब तैमूरलंग बनाम सर्वखाप लड़ाई का इतिहास लिखा जाएगा तो '''दादीराणी रामप्यारी गुर्जरी''' जी की कहानी भी स्वत: गाई जाएगी।398 ई में भारत पर क्रूर हमला किया। तैमूर ने क्रूर और खुली लूट पाट की, वह बहुत ही करुर था, एक महापंचायत में सभी समाज के लोगो ने तैमूर, की सेना से छापामार युद्ध लड़ने कीरणनीति बनायीं , और महापंचायत ने सर्व समाज की एक सेना तेयार की इस महापंचायत सेना के ध्वज के तहत 80,000  योद्धा  सैनिकों और 40,000 युवा महिला सेनिक  हतियारो के साथ शामिल हुए थे। महिला सैनिक राम प्यारी के नेतृत्व मे थी ,और 80,000 यौध्दा के सुप्रीम जनरल चुना महाबली जोगराज सिंह गुर्जर थे गया व हरवीर सिंह गुलिया सेनापति थे। डिप्टी जनरल  थे तैमुर लंग के खुनी कत्लेआम से शायद ही कोई अनभिज्ञ हो। इन्होने बहुत बाहदुरी के साथ तेमूर की सेना का मुकाबला किया। इस युद्ध में सभी समाज के लोगो ने भाग लिया था। इसयुद्ध मे बुरी तरह घायल होने के कुछ दिनों बाद ही तेमूर लंग की मौत हो गई।
वीरांगना रामप्यारी गुर्जरी ने देशरक्षा के लिए शत्रु से लड़कर प्राण देने की प्रतिज्ञा की। जोगराज के नेतृत्व में बनी 40000 हजार ग्रामीण महिलाओं को युद्ध विद्या का प्रशिक्षण व् निरीक्षण जा जिम्मा रामप्यारी चौहान गुर्जरी व् इनकी चार सहकर्मियों को मिला था। इन 40000 महिलाओं में गुर्जर, जाट, अहीर, राजपूत, हरिजन, वाल्मीकि, त्यागी, तथा अन्य वीर जातियों की वीरांगनाएं थी। रामप्यारी के नेतृत्व मे इस महिला सेना का गठन ठीक उसी ढंग से किया था जिस ढंग से सेना का था। प्रत्येक गांव के युवक-युवतियां अपने नेता के संरक्षण में प्रतिदिन शाम को गांव के अखाड़े पर एकत्र हो जाया करते थे और व्यायाम, मल्ल विद्या तथा युद्ध विद्या का अभ्यास किया करते थे। गांव के पश्चात खाप की सेना विशेष पर्वों व आयोजन पर अपने कौशल सार्वजनिक तौर पर प्रदर्शित किया करती थी। सर्व खाप पंचायत के सैनिक प्रदर्शन यदा-कदा अथवा वार्षिक विशेष संकट काल में होते रहते थे| लेकिन संकट का सामना करने को सदैव तैयार रहते थे। इसी प्रकार रामप्यारी गुर्जरी की महिला सेना पुरूषों की भांति सदैव तैयार रहती थी। ये महिलाएं पुरूषों के साथ तैमूरलंग के साथ युद्ध में कन्धे से कन्धा मिला कर लड़ी। 

शनिवार, 14 मई 2016

गुर्जर सम्राट पृथ्वीराज चौहान / Gurjar Samrat Prithviraj Chauhan

गुर्जर सम्राट - पृथ्वीराज चौहान / Gurjar Samrat Prithviraj Chauhan

पृथ्वीराज चौहान / Prithviraj Chouhan



पृथ्वीराज चौहान (सन् 1166-1192) गुर्जर–चौहान वंश के हिंदू राजा थे जो उत्तरी भारत में 12 वीं सदी के उत्तरार्ध के दौरान अजमेर और दिल्ली पर राज्य करते थे। पृथ्वीराज को 'राय पिथौरा' भी कहा जाता है। वह गुर्जर के चौहान राजवंश का प्रसिद्ध राजा थे। पृथ्वीराज चौहान का जन्म अजमेर राज्य के वीर गुर्जर महाराजा सोमश्वर के यहाँ हुआ था।उनकी माता का नाम कपूरी देवी था जिन्हेँ पूरे बारह वर्ष के बाद पुत्र रत्न कि प्राप्ति हुई थी। पृथ्वीराज के जन्म से राज्य मेँ राजनीतिक खलबली मच गई उन्हेँ बचपन मेँ ही मारने के कई प्रयत्ऩ किए गए पर वे बचते गए। पृथ्वीराज चौहान जो कि वीर गुर्जर योध्दा थे बचपन से ही तीर और तलवारबाजी के शौकिन थे। उन्होँने बाल अव्सथा मेँ ही शेर से लड़ाई कर उसका जबड़ा फार डाला। पृथ्वी के जन्म के वक्तही महाराजा को एक अनाथ बालक मिला जिसका नाम चन्दबरदाई रखा गया। जिन्हेँ आगे चलकर कविताओँ का शौक हो गया। चन्दबरदाई और पृथ्वीराज चौहान बचपन से ही अच्छे मित्र औरभाई समान थे। वह तंवर वंश के राजा अनंगपाल तंवर गुर्जर का दौहित्र (बेटी का बेटा) था और उसके बाद दिल्ली का राजा हुआ। उसके अधिकार में दिल्ली से लेकर अजमेर तक का विस्तृत भूभाग था। पृथ्वीराज ने अपनी राजधानी दिल्ली का नवनिर्माण किया। तोमर नरेश ने एक गढ़ के निर्माण का शुभारंभ किया था, जिसे पृथ्वीराज ने सबसे पहले इसे विशाल रूप देकर पूराकिया। वह उनके नाम पर पिथौरागढ़ कहलाता है और दिल्ली के पुराने क़िले के नाम से जीर्णावस्था में विद्यमान है। कई इतिहासकारों के अनुसार अग्निकुल गुट मूल रूप से गुर्जर थे और चौहान गुर्जर के प्रमुख कबीले था। चौहान गुर्जर के चेची कबीले से मूल निकाले जाते हैं। बंबई गजेटियर के अनुसार चेची गुर्जर ने अजमेर पर 700 साल राज किया। इससे पहले मध्य एशिया में तारिम बेसिन (झिंजियांग प्रांत) के रूप में जाना जाता क्षेत्र में रहते थे। Chu- हान विवाद (200 ईसा पूर्व), "चू" राजवंश और चीन के "हान" राजवंश के बीच वर्चस्व की लड़ाई जिसमे yuechis / Gujars भी इस विवाद का हिस्सा थे। गुर्जर जब भारत मे अरब बलों से लड़ते थे । जब वे "चू-हान" शीर्षक अपने बहादुर सैनिकों को सम्मानित करने के लिए प्रयोग किया जाता था जो बाद मे चौहान कहा जाने लगा अंततः 

पृथ्वीराज चौहान 1166 ईस्वी में अजमेर में पैदा हुआ थे । उनके पिता गुर्जर सोमेश्वर चौहान और मां कपूरी देवी, एक कलचुरी (चेडी) राजकुमारी, (त्रपूरी के अचलराजा की बेटी)। गौरी ने भारत पर कई बार हमला किया था । पहली लड़ाई 1178 ईसवी में माउंट आबू के पास कायादरा पर लड़ी गयी और प्रथ्वी ने गोरी को भरपूर हराया था। इस हार के बाद गौरी गुजरात के माध्यम भारत में कभी नही घुसा । 1191 में तारोरी की पहली लड़ाई में पृथ्वीराज चौहान ने घुड़सवार सेना और गोरी पर कब्जा कर लिया। गोरी ने अपने जीवन की भीख मांग ली । पृथ्वीराज ने उसे दोबारा ना घुसने की चेतावनी देकर उसको सेनापतियों के साथ जाने की अनुमति दी।
Prithviraj Chauhan

मोहम्मद गोरी और गयासुद्दीन गजनी ने 1175. में भारत आक्रमण शुरू कर दिया। और 1176 में मुल्तान पर कब्जा कर लिया ।1178 ईस्वी में मोहम्मद गोरी ने गुजरात पर आक्रमण किया और गुर्जरेश्वर भीमदेव शोलंकी ने अच्छी तरह से हरा दिया और गुजरात से वापस भगा दिया । यह वही साल था जब पृथ्वीराज चौहान अजमेर और दिल्ली के सिंहासन पर चढ़े थे । उस समय तक"गुर्जर शासक " गोरी के आगामी खतरे से अच्छी तरह परिचित थे।गुर्जरेश्वर भीमदेव सोलंकी ने "गुर्जर मंडल" नामक एक संघ के तहत सभी "क्षत्रिय" शासकों को एकत्र किया । गोरी 1186 ईस्वी में पंजाब पर कब्जा कर लिया। चौहान इस समय तक सुप्रीम लॉर्ड्स बन गया था ie.. 1187-88 ईस्वी गुर्जरेश्वर भीमदेव और पृथ्वी भी रक्त के द्वारा एक दूसरे से संबंधित थे । 

तो भीमदेव ने इस समूह का नेतृत्व करने के लिए पृथ्वी से पूछा।पृथ्वी ने तारेन (1191 ईस्वी) में गोरी के खिलाफ लड़ाई लड़ी। जिसमे गुर्जर कुल यानी खोखर, घामा, भडाना, सौलंकी, प्रतिहार और रावत ने भाग लिया। खांडेराव धामा (पृथ्वी की पहली पत्नी का भाई) के आदेश के तहत गुर्जरो और खोखर के संयुक्त बलों ने मुश्लिम को बुरी तरह हराया और सीमा तक उनका पीछा किया। गोरी बुरी तरह घायल हो गया था और उसकी घुड़सवार द्वारा युद्ध के मैदान से दूर ले जाया गया था। ) "पृथ्वी विजय" और "पृथ्वीराज रासो" में कहा कि उन्हें पृथ्वी द्वारा कब्जा कर लिया गया था बल्कि वह भाग खडा हुआ और एक साल (1192 ईस्वी) के बाद गोरी दोगुने बलों के साथ लौट आया इस समय तक खोखार गुर्जर से चला गया , सोलंकी और चौहान के बीच एक अजीब प्रतिद्वंद्विता शुरू हो गई। यह पृथ्वी की एकल बलों की हार थी । और घामा को तार्रेन युद्ध के पहले दिन में मौत की सजा दे दी गई । पृथ्वी को भी गौरी के दास द्वारा हार का नेत्र्तव करना पडा । कुतुब-उद-दीन-ऐबक नाम दिया है। जिसको बाद मे दिल्ली की गद्दी इनाम के रूप मे दी गई पृथ्वीराज अपनी मौत से मिलने के लिए स्पष्ट रूप से अपनी अदालत में गोरी को मारता है और कैसे यह है। पृथ्वीराज चौहान की कब्र गोरी की कब्र के बगल में आज तक मौजूद है। और 1200 के आसपास चौहान की हार के बाद राजस्थान का एक हिस्सा मुस्लिम शासकों के अधीन आ गया। शक्तियों का प्रमुख केन्द्रों नागौर और अजमेर थे। पृथ्वी भी 1195 ईस्वी में हार के बाद गुर्जरेश्वर का ताज अजमेर के हमीर सिंह चौहान ( पृथ्वी का भाई) ने लिया इसके बाद कन्नौज (1193 ईस्वी), अजमेर (1195), अयोघ्या, बिहार (1194), ग्वालियर (1196), अनहीलवाडा (1197), चंदेल (1201 ईस्वी) पर मुसलमानों द्वारा कब्जा कर लिया गया और "गुर्जर मंडल" उस के बाद समाप्त हो गया।यह केवल 1400 ई के बाद एक नए नाम के साथ इतिहास में दिखा । 1398 ईस्वी में हिंदू योद्धाओं को लैंग की 'आमिर तैमूर' द्वारा 'राजपूत' के रूप में संबोधित कर रहे थे। राजपूत, राजा का पुत्र या बेटे से मतलब नहीं है। राजपूत"राज्य-पुत्र"  जिसका मतलब "राज्य के बेटे" से है। और आक्रमणकारियों से अपने राज्य वापस पाने के लिए आयोजित किया जाता था राजपूत संघ (मारवाड़ क्षेत्र में) 13 वीं सदी के दौरान मुस्लिम आक्रमणकारियों से लड़ने के लिए बनाई गई थी। यह प्रसिद्ध गुर्जर कुलों यानी (प्रतिहार, पंवार, चालुक्य, चौहान, गुहीलोट, गेहडवाल, चंदेल, तोमर/तंवर, छावडा, घामा) आदि जैसलमेर और देवगिरि प्लस दहिया और खोखरस तरह कुछ चयनित योद्धा जाट जनजातियों के यादवों के साथ द्वारा बनाई गई थी। गुर्जर जाति के चौहान पश्चिमी उत्तर प्रदेश (कलश्यान चौहान), मैनपुरी उत्तर प्रदेश में और राजस्थान के नीमराना अलवर  जिले में हैं, यहां के चौहान मुख्यतः हिंदू हैं । लेकिन पंजाब में वे सिख हैं। पाकिस्तान में चौहानों मुख्य रूप से मुसलमान हैं। अनंगपाल तंवर और पृथ्वीराज चौहान गुर्जर थे। 

13 गांव गुर्जर तंवरों के महरौली में है , दक्षिण दिल्ली में 40 से अधिक गांव गुर्जर तंवरों (मुस्लिम) के गुड़गांव में  हैं। व अभी भी तंवरो को दिल्ली का राजा कहा जाता है। पाकिस्तान के एक प्रसिद्ध लेखक राणा अली हसन चौहान जिनका परिवार विभाजन के दौरान पाकिस्तान  चला गया, वह पृथ्वीराज की 37 वीं पीढ़ी से हैं। प्रवासन और गुर्जर चौहान के तुपराना, कैराना, नवराना और यमुना नदी के तट पर अन्य गुर्जर चौहानों के  गांव अभी भी मौजूद हैं, इसके अलावा दापे चौहान और देवड़ा चौहान के 84 गांव यूपी में हैं। अतः ... प्रतिहार, सौलंकी और तंवर के साथ पृथ्वी के संबंध थे! 1178 ईस्वी में गुर्जर मंडल का उनका गठन और उनकी वर्तमान पीढी अजमेर के चौहान शासकों अजय पाल, पृथ्वीराज ,जगदेव, विग्रहराज पंचम ,अपरा गंगेया, पृथ्वीराज द्वितीय, और सोमेश्वर हैं। मैनपुरी के चौहान शासकों में प्रताप रुद्र, वीर सिंह, घारक देव, पूरन चंद देव, करण  देव और महाराजा तेज सिंह चौहान )|