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बुधवार, 15 फ़रवरी 2017

जुनबिल हूण ( गुर्जर की खाप श्वेत हूण की एक शाखा ) | Zunbil Hun (Branch of White Hun Gurjars)

जुनबिल हूण ( गुर्जर की खाप श्वेत हूण की एक शाखा )

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Zunbil huna Gurjar | Gurjar Vs Arab Wars


जुनबिल हूणो ने लगभग ढाई सौ सालो तक हिन्दुकुश पर्वत के उत्तर में राज किया। ये भाग आजका अफगानिस्तान का बडा भूभाग है।
इन्हें जुन्बिल क्यों कहा जाता था ? गुर्जर हूणो की यह शाखा एक जून देवता की पूजा करती थी यह जून देव सूर्यदेव यानी मिहिर का दूसरा रूप है। जून भगवान की पूजा करने के कारण ही ये जुन्बिल कहलाये।
तत्कालीन जुन्बिल साम्राज्य में जून का एक बेहद सुन्दर व बडा मन्दिर भी था जिसे बाद में अरब आक्रमणकारियो ने तोड दिया था। यह हूणो की वह शाखा थी जो जाबुलिस्तान में थी व इनकी एक शाखा ने गुर्जरदेश में जाबुलपुर यानी जालौर बसाया। 610 ई० से 710 ई० तक जुन्बिलो व अरब आक्रमणकारियो के बीच युद्ध चले । जुन्बिलो ने कई भीषण युद्धो में हराकर अरबो को भगाया मगर ईस्लामिक साम्राज्य की बढती ताकत धार्मिक उन्माद से हर बार आ रही थी ।

जुनबिल हूणो को आज इतिहास में भुला दिया गया है जो कि गुर्जरो के पराक्रम को कम करने का कुत्सित प्रयास है।
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रविवार, 31 जुलाई 2016

गुर्जर हूण वीरो की विजयनी सैना | Victorious Army of Huna Veer Gurjars

गुर्जर हूण वीरो की विजयनी सैना 

गुर्जर हूण वीरो की विजयनी सैना | Victorious Army of Huna Veer Gurjars

हूण पशुजीवी ही नही थे आयुध जीवी भी थे । बडे - बडे व दूर - दूर तक लम्बे धावे मारना इनका शोक था  ।

हूण वीरो की लडाई की एक बडी चाल थी,  दुश्मन के सामने पराजित होने का अभिनय कर के भाग पडना । ओर जब दुश्मन उनका पीछा करते कुछ दूर निकल जाता  , तो सुशिक्षित,  सुसंगठित जहां - तहां छिपे हुये हूणवीरो के दस्ते शत्रु की पीठ पर आक्रमण कर देते  ।

हूणवीर माउदून ने चीन के युद्ध मे एक बार इस तरह 3  लाख  20 हजार चीनी सेनिको को अपने जाल मे फसा लिया था  ।

चीन सम्राट अपनी सेना के साथ आधुनिक ता - तुड - फू ( शेनसी  ) से एक मील दूर एक दृढ दुर्ग- बद स्थान पर पहुच चुका था  , लेकिन  उसकी अधिकांश सेना पीछे रह गयी थी  ।

हूण वीर " माउदून " अपने 3 लाख सैनिको के साथ चीनियो पर टूट पडा ओर चीनी सम्राट चारो तरफ से घिर गया । चीनी सेना 7 दिन तक घिरी रही  । बडी मुश्किल से चीनी अपने सम्राट को घेर मे से बाहर निकाल पाये । माउदून के घेरे का एक कोना ढीला था । इस निर्बल कोने से चीनी सम्राट निकल भागने मे समर्थ हुआ । माउदून ने पीछा नही किया ।
समझोते मे चीनियो को बहुत अपमानजनक बाते स्वीकार करनी पडी । हूणवीर  माउदून के साथ चीनी सम्राट का समझोता हुआ ओर चीनियो को अपनी एक राजकुमारी  , रैशम तथा बहुमूल्य हीरे जवाहरात,  रत्न,  चावल,  अगूंरी शराब तथा बहुत तरह के खाद्य पदार्थ  भेंट देने के लिये मजबूर होना पडा  ।

इस तरह चीनी राजकुमारीयो का शक्तिशाली हूण वीरो से ब्याह करने की प्रथा चली ।
क्योकि राजकुमारी का लडका मातृपक्ष का पक्षपाती होगा  ।

चीन सम्राट  हूड-ती के मरने के बाद उसकी विधवा रानी को -ठूँ अपने पुत्र  ( वैन - ती  ) को बैठा कर बारह साल  ( 187 - 179  ईसापूर्व ) तक स्वय राज करती रही । हूण वीरो मे पितृ - सताक समाज होने के कारण कुछ सुभीता था,  जिसके कारण कितने ही चीनी भाग कर उनके राज्य मे चले आते थे ।

 ऐसे ही किसी दरबारी की बातो मे पडकर माउदून ने रानी को सदेंश-पत्र- भेजकर अपने हाथ ओर ह्रदय को देने का प्रस्ताव किया ।
दरबारीयो ने युध्द की आग भडकाने की कोशिश करी , लेकिन किसी समझदार ने चीनी रानी को समझाया

  " कि अभी भी हमारी आम जनता हमारी ही सडको पर चीनी सम्राट के युध्द से भागने के गीत गाते फिरते हे "

 चीनी रानी ने कूटनीतिक रूप से हूणवीर सम्राट   माउदून को बहुत नरम सा  पत्र लिखा -- " मेरे  दाँत ओर केश परम भटारक ( आप ) को प्राप्त करने के योग्य नही हे "  साथ ही दो राजकीय रथ  , बहुत से अच्छे घोडे तथा दूसरी बहुमूल्य भैंट भेजी ।

 तब जाकर " माउदून " को दरबारीयो की अनावश्यक युध्द करवाने की चाल समझ आई ओर इस पर हूण वीर माउदून अत्यंत लज्जित हुआ ओर उसने बहुत से हूणी घोडे भेज कर चीनी रानी से  क्षमा मागी ।
हूणवीर माउदून ने बहुत लम्बे समय तक  ( 36 साल ) राज्य किया ।

सन्दर्भ :--
1. A Thousands years of Tattars :- E.  H. Parker,  Shanghai - 1895
2. Histoire d ' Attila et De ses successures : Am. Thierry -- Paris - 1856 
3. History of the Hing - nu in their Relations with China :-- Wylie - Journal of Anthropological institute -- London,  Volume III - 1892 -93

शुक्रवार, 29 जुलाई 2016

महान धनुर्धर प्राचीन हूण गुर्जरो की शासन व्यवस्था का विवरण (ईसापूर्व)

महान धनुर्धर प्राचीन हूण गुर्जरो की शासन व्यवस्था  ( ईसापूर्व )

हूण गुर्जर साम्राज्य । Hun Gurjar | Hoon Gurjar | History | Huna Gurjar 

हूण गुर्जर वीरों की शासन व्यवस्था का विवरण 


1. शान -'यू :

राजा वाची चीनी शब्द शान - यू का हूण भाषा रूप  जैंगी कहा जाता है। शायद इसकी रूपान्तर " चंगीज" हुआ । राजा की पूरी उपाधि थी

" तेंग्री - कुदू - शान - यू " ( दैव पुत्र महान )

आज भी मंगोल ओर तुर्की भाषा मे देवता वाचक ""तेंग्री " शब्द मोजूद है । शान- यू  प्रभावशाली योध्दा ओर नेता होता , लेकिन उसके ऊपर हूण ओर्दू का नियन्त्रण रहता था

2. दूगी :--

इसका अर्थ होता हे धर्मात्मा या न्यासी । शान-यू के नीचे दूगी हुआ करते थे , जिनमे एक को पूर्वी - दूगी ओर दूसरे को पश्चिम - दूगी कहते थे ।

 पूर्वी दूगी का दर्जा ऊॅचा समझा जाता था,  ओर आमतौर से वह युवराज माना जाता था ।
हूण साम्राज्य के पूर्व भाग पर पूर्वी - दूगी का शासन था ओर पश्चिम पर पश्चिमी दूगी का ।

 राज्य के मध्य भाग पर अर्थात हूण - जन क्षैत्र पर स्वयं शान - यू सीधे शासन करता था ।

3. रूक - ले  ( कुनलू ) :----

यह भी दक्षिण ओर उतर दो होते थै , उत्तर का दर्जा ऊॅचा होता था

4 . इनके नीचे उतर ओर दक्षिण के दो सेनापति होते थे
5. इनके नीचे वाम दक्षिण के दो दिवान होते थे । आगे भी दो वाम दक्षिण कुतलू जेसे दस हजारी ओर हजारी तक के चोबीस सेनिक अधिकारी होतै थे । हूण - शासन मे सेनिक- असेनिक अधिकार का भेद नही था  ।

इनके अतिरिक्त हूण - शासको की उपाधि श्रृंगो से समझी जाती थी ,  जो शायद समय - समय पर उनके श्रंगार होते हो  ।

 दोनो दूनी ओर दोनो रूकले चतुःश्रृंग कहे जाते थे ।

उनके नीचे षट -'श्रृंग अधिकारी थे ।
दोनो कुतलू शासन प्रबंध को देखते थे ।

दूगी आदि  24  श्रेष्ठ अधिकारीयो के अपने क्षैत्र थे,  जिनके भीतर ही वह अपने ओर्दू तथा पशुओं को लेकर  विचरण कर सकते थे उनको अपने हजारी,  शतिक ओर दक्षिक आदि अफसरो के नियुक्ति के अधिकार थे ।

शान - यू की रानी की पदवी इन - ची ( येडःची )  थी ।

 हूणो के तीन - चार ऊंचे कुलो मे से उसे  लिया जाता था । शान - यू का अपना कुल भी बहुत सम्मानित समझा जाता था ।
 हूणो की जो श्रैणिया ओर पदवीयां स्थापित की थी ।

वह तुर्को ओर मंगोलो के समय तक मानी जाती रही
हजारी,  पंच हजारी,  दस हजारी दर्जे स्वीकार किये गये थे ।

सन्दर्भ :--
1 . A Thousand Years of  Tatars : E.  H . Parker, Shanghai - 1895
2. हुन्नू इ गुन्नी : क. इनस्त्रान्त्सेफ,  लेनिनग्राद - 1926
3. Histoire des Huns : Desqugue - Paris : 1756