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सोमवार, 27 जून 2016

Gurjar Samrat Mihir Bhoj Wallpapers in HD

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बुधवार, 15 जून 2016

सफलता की कुंजी - गुर्जर सम्राट मिहिर भोज

सफलता की कुंजी - गुर्जर सम्राट मिहिर भोज

Gurjar Samrat Mihir Bhoj Wallpaper HD

गुर्जर सम्राट मिहीर भोज बहुत पराक्रमी राजा थे, हर युद्ध मे विजय होते थे उनकी बुद्धिमानी के दूर दूर तक चर्चे थे , एक बार उनके दरबार मे एक अरब यात्री सुलेमान आया और राजा से उनकी सफलता का राज पूछा
सुलेमान ने पुछा हे राजन गुर्जेशवर सम्राट आप हमे बतायें कैसे हर काम मे सफल हुआ जा सकता है,कैसे आपने इतने राज्य जीत लिये,सफलता का राज क्या है?

सम्राट भोज ने उनसे कहा आप आज हमारे महल मे आराम किजिये सुबह होने पर आपको सफलता की कुंजी दे दी जायेगी

सुबह होने पर राजमहल के सामने सम्राट ने तीन मिट्टी के ढेर लगवाये और उन्मे तीन चाबिंया(कुंजी) छुपा दी सुलेमान से कहा इस ढेर मे तीन चाबियां छुपी है उन तीनो मे से एक सफलता की कुंजी है आप जायें और ढुंढ ले।

सुलेमान पहले ढेर मे देखने लगा उसे तुरन्त कुंजी मिल गयी वो बहुत खुश हुअा, फिर दुसरे ढेर मे ढुंढने लगा लेकिन बहुत समय लग रहा था कुछ घंटे बाद उसको दुसरी कुंजी भी मिल गयी लेकिन वो थकावट महसूस कर रहा था।

अब बारी तिसरी और अंतिम कुंजी की थी, सुलेमान कुंजी खोजने लगा,  सारा ढेर खत्म होने को आया था लेकिन कुंजी नही मिली,उसने राजा से कहा लगता है यंहा कोई कुंजी नही है राजन, परन्तु गुर्जर सम्राट ने कहा सुलेमान यंही है वो, देखो ढेर मे,  अब सुलेमान थक कर चूर हो चुका था उसने अंतिम बार ढेर को टटोला तभी उसको कुंजी दिखाई दी

सुलेमान ने राजा भोज से पुछा अब बताये कोनसी है इनमे से सफलता की कुंजी

सम्राट मिहीर भोज ने कहा सफलता की तीन कुंजी "भाग्य" " मेहनत" " आत्मविश्‍वास" है साथ मे भाग्य, आत्मविश्‍वास है यही वो तीन है
तुम्हारा "भाग्य" अच्छा था जो तुम्हे पहले ढेर मे कुंजी पहले ही प्रयास मे मिल गयी,दुसरे ढेर मे "मेहनत" थी समय लगा लेकिन मेहनत काम आयी  लेकिन तिसरे ढेर मे भाग्य ने तुम्हारा साथ नही दिया तुम्हे बहुत मेहनत करनी पडी,लेकिन तुम प्रयास करते रहे अंत मे तुम्हे सफलता जरूर मिली तुम्हे विश्वास था के कुंजी मिलेगी जरुर चाहे कितना ही समय लग जाये तुम परेशान थे तुम ने जितने की आस छोड दी थी लेकिन कुंजी वही थी अपने स्थान पर और तुमने मेहनत की "आत्मविश्‍वास" बनाये रखा अधिक मेहनत की अंत मे तुम सफल हुये।

ऎसे ही जिंदगी मे कुछ लोग पहले ही प्रयास मे सफल हो जाते है,कुछ दुसरे प्रयास मे परन्तु कुछ को लक्ष्य के लिये बहुत अ्धिक मेहनत करनी पडती है लेकिन वो भी अंत मे जीत ही जाते है।

इसी तरह राजा मिहीर ने बताया
मै हर युद्ध मे सफल होता हुं
क्युके कुछ राज्य तो मै खेल खेल मे जीत लेता हुं
कुछ बडे राज्य मै अपनी विशाल सेना के कारण जीत लेता हुं
कुछ राज्य मै अपने प्रयासों से जीत लेता हुं
भाग्यवान तो मै हुं ही जो एक राजा के घर जन्म लिया
वीर तो मै हुं ही जो गुर्जरी मां का दुध पीया
देशभक्ति तो मेरे रक्त मे है जो गुर्जर देश का इतना विस्तार किया।

सुलेमान ने अपने अरब देश जाकर अरब शासको को चेताया के उस महान राजा से मत टकराये अन्यथा मुंह की खानी पडेगी
सुलेमान ने अपनी पुस्तकों मे गुर्जर सम्राट का गुणगान किया।

गुरुवार, 9 जून 2016

गुर्जर सम्राट मिहिर भोज, भोजपुरी भाषा और भोजपुर (बिहार) के बीच का संबंध

गुर्जर सम्राट मिहिर भोज, भोजपुरी भाषा और भोजपुर (बिहार) के बीच का संबंध

उगता भारत ब्यूरो | इतिहास के पन्नो से | स्वर्णिम इतिहास | गुर्जर सम्राट मिहिर भोज | भोजपुरी भाषा और भोजपुर (बिहार) के बीच का संबंध |



Gurjar Samrat Mihir Bhoj | गुर्जर सम्राट मिहिर भोज

भोजपुर,बिहार जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, भोजपुरी भाषा बोलने वाला सांस्कृतिक क्षेत्र है। बिहार के अलावा पूर्वी उत्तर-प्रदेश का कुछ क्षेत्र भी इस सांसकृतिक पॉकेट का अभिन्न हिस्सा है।बिहार शायद एक अनोखा राज्य है जो अपने अलग-अलग सांस्कृतिक भू-भागों में अलग-अलग सांस्कृतिक धरोहरों के लिए विख्यात है। भोजपुरी क्षेत्र निष्कर्षत: लोक-संस्कृति प्रधान रहा है। भोजपुर क्षेत्र की सीमा को विद्वानों ने उत्तर में हिमालय पर्वतमाला की तराई, दक्षिण मध्यप्रान्त का जसपुर राज्य, पूर्व में मुजफ्फपुर की उत्तरी-पश्चिमी भाग और पश्चिम में बस्ती तक के विस्तार को माना है। इस प्रकार इसका क्षेत्रफल लगभग पच्चास वर्गमील है।

पृथ्वीसिंह मेहता अपनी पुस्तक बिहार एक ऐतिहासिक दिग्दर्शन में लिखते है कि गुर्जर प्रतिहार वंश के शासक गुर्जर सम्राट मिहिर भोज ने अपने नाम से भोजपुर किले की स्थापना की। लेखक पृथ्वीसिंह मेहता का मत है कि कन्नोज के गुर्जर प्रतिहार सम्राट मिहिर भोज ने भोजपुर बसाया था। भोजपुर राजा भोज का बसाया है, यह बात जनता में आजतक प्रचलित है, लेकिन कन्नोज के गुर्जर सम्राट मिहिर भोज को भूल जाने के कारण लोग आज धार (मालवा) के राजा भोज परमार को उसका संस्थापक मान बैठे हैं। मालवा का राजा भोज परमार महमूद गजनवी का समकालीन था और बिहार से उसका कोई सम्बन्ध न था। उत्तरी भारत में के लगभग 836 ई0 गुर्जर सम्राट रामभद्र का बेटा गुर्जर सम्राट मिहिर भोज गद्दी पर बैठा। भोज के गद्दी पर बैठते ही स्थिति बदल गयी। देवपाल को हराकर उसने शीध्र ही कन्नौज वापस ले लिया और भिन्नमाल की जगह कन्नौज को ही अपना राजधानी बनाया। हिमालय में काश्मीर की सीमा तक का प्रदेश जीतकर ने अपने राज्य में शामिल कर लिया और अपनी पश्चिमी सीमा वहाँ मुलतान के अरब राज्य तक पहुँचा दी।

पूरब में गुर्जर सम्राट मिहिर भोज के राज्य की सीमा बिहार तक थी। राजा देवपाल से उसने पश्चिमी बिहार (प्राचीन मल्ल देश) छीन लिया।गुर्जर सम्राट मिहिर भोज के ग्वालियर प्रशस्ति (इपिग्राफिका इंडिका-भाग 12 , पृ0 156 ) से यह स्पष्ट होता है कि इसने धर्मपाल के पुत्र देवपाल को हराया था, साथ ही सारन जिले के दिवा-दुवौली ( इण्डियन एंटिक्वेरी – भाग 12 , पृष्ठ 112 ) नामक गाँव से पाये गये ताम्रपत्र से भी यह बात सिद्ध होती है कि प्रतिहार भोज का राज्य गोरखपुर तथा सारन तक था। पृथ्वीसिंह मेहता यह भी लिखते हैं कि पालों कि रोकथाम के लिए उन्होने शाहबाद जिले में अपने नाम से भोजपुर की स्थापना की। उसी भोजपुर नाम से आज पश्चिमी बिहार की जनता और उनकी बोली भोजपुरी कहलाती है। पृथ्वीसिंह मेहता का विचार अधिक प्रामाणिक है , क्योंकि कम से कम गुर्जर सम्राट मिहिर भोज का राज्य सारन तक तो रहा। इसकी संभावना भी है कि उसने पालों की रोकथाम के लिए भोजपुर में किले की स्थापना की गुर्जर सम्राट मिहिर भोज के भोजपुर में किला बनवाने की बात ही सबसे अधिक कही जाती है।
प्रस्तुति : राकेश आर्य (बागपत)
http://www.ugtabharat.com/relation-of-mihir-bhoj-and-bhojpuri-language-and-bhojpur/